विश्व इतिहास के विलुप्त अध्याय ::::: पुरुषोत्तम नागेश ओक (भारतीय इतिहास पुनर्लेखन संस्थान अध्यक्ष )
****दिल्ली का लालकिला हिन्दू लालकोट है |****
जनरल कनिघम ने ,जिसे भारत मे पुरातत्वीय सर्वेक्षण का आयोजन कार्य सौपा गया था ,यह पूर्व अनुमान करके मूल प्रारम्भिक गलती कर डाली कि भारत मे स्थित सभी मध्यकालीन भवन आक्रमणकारियो द्वारा बनवाए गए थे |
शाहजहाँ के शासनकालीन दरबारी कागज पत्रो मे उपलब्ध ऐसा एक भी टुकड़ा नही है जो शाहजहाँ द्वारा लालकिला निर्माण करने के सम्बंध मे किसी भी प्रकार का भ्रम उत्पन्न करता हो |
लालकिला के आरामगाह मे प्राचीन हिन्दू राज चिन्ह देदीप्तमान सूर्य का एक बड़ा प्रतिबिम्ब समाविष्ट है |इसके दोनों पक्षो मे पवित्र हिन्दू अक्षर ॐ है |कमल नाल पवन हिन्दू कलश (कुम्भ) पर स्थित है |हिन्दुओ के लिए अति पवित्र चार शंख उस स्फटिक फ़लक मे देखे जा सकते है |तुला वाला हिन्दू राजचिन्ह जिस राजोचित भाग मे है उसी कक्ष द्वारो पर गजमस्तक बने हुए है जिन पर महावत बैठे है |हिन्दू सूर्य चिन्ह सबसे बाहरी द्वार से लेकर सर्वाधिक भीतरी भाग तक सम्पूर्ण किले मे उत्कीर्ण है |
अन्य प्रमाण –शाहजहाँ के काल का चित्र होना है |बोड्लियन पुस्तकालय ,आक्सफोर्ड मे सुरक्शित रखे इस चित्र मे ,उसमे दिये गए शीर्षक के अनुसार ,शाहजहाँ को दिल्ली के लालकिले मे बने दीवाने-आम कक्ष मे सन 1628 ई मे फारसी राजदूत का स्वागत करते हुए दिखाया गया है |उसी चित्र की प्रतिकृति इल्स्ट्रेटड़ वीकली ऑफ इण्डिया के मार्च 1971 ई के अंक मे प्रक्षित है |चूकि शाहजहाँ राजगद्दी पर सन 1628 ई के फरवरी मास मे बैठा था इसलिए वह फारसी राजदूत का स्वागत लालकिले मे उसी वर्ष मे नही कर सकता था , यदि किला उससे पूर्व विध्यमान न रहा होता |
श्री ए के फोर्बस द्वारा लिखित *रसमाल* पुस्तक मे उस शिलालेख का संदर्भ है जिसमे उल्लेख है कि हिन्दू सम्राट *अनंगपाल* ने दिल्ली का लालकोट–लालकिला 11 वी शताब्दी मे बनाया था |