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Wednesday, June 27, 2012

स्वास्तिक का महत्व



स्वास्तिक को चित्र के रूप में भी बनाया जाता है और

लिखा भी जाता है जैसे "स्वास्ति न इन्द्र:" आदि.
स्वास्तिक भारतीयों में चाहे वे वैदिक
हो या सनातनी हो या जैनी ,ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य
शूद्र सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह आदि संस्कार घर
के अन्दर कोई भी मांगलिक कार्य होने पर "ऊँ" और
स्वातिक का दोनो का अथवा एक एक का प्रयोग
किया जाता है।
हिन्दू समाज में किसी भी शुभ संस्कार में स्वास्तिक
का अलग अलग तरीके से प्रयोग किया जाता है,बच्चे
का पहली बार जब मुंडन संस्कार किया जाता है
तो स्वास्तिक को बुआ के द्वारा बच्चे के सिर पर
हल्दी रोली मक्खन को मिलाकर
बनाया जाता है,स्वास्तिक को सिर के ऊपर बनाने
का अर्थ माना जाता है कि धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष
चारों पुरुषार्थों का योगात्मक रूप सिर पर
हमेशा प्रभावी रहे,स्वास्तिक के अन्दर चारों भागों के
अन्दर बिन्दु लगाने का मतलब होता है
कि व्यक्ति का दिमाग केन्द्रित रहे,चारों तरफ़ भटके
नही,वृहद रूप में स्वास्तिक की भुजा का फ़ैलाव सम्बन्धित
दिशा से सम्पूर्ण इनर्जी को एकत्रित करने के बाद बिन्दु
की तरफ़ इकट्ठा करने से भी माना जाता है,स्वास्तिक
का केन्द्र जहाँ चारों भुजायें एक साथ काटती है,उसे सिर
के बिलकुल बीच में चुना जाता है,बीच का स्थान बच्चे के
सिर में परखने के लिये जहाँ हड्डी विहीन हिस्सा होता है
और एक तरह से ब्रह्मरंध के रूप में उम्र की प्राथमिक
अवस्था में उपस्थित होता है और वयस्क होने पर वह
हड्डी से ढक जाता है,के स्थान पर बनाया जाता है।
स्वास्तिक संस्कृत भाषा का अव्यय पद है,पाणिनीय
व्याकरण के अनुसार इसे वैयाकरण कौमुदी में ५४ वें क्रम
पर अव्यय पदों में गिनाया गया है। यह स्वास्तिक पद ’सु’
उपसर्ग तथा ’अस्ति’ अव्यय (क्रम ६१) के संयोग से
बना है,इसलिये ’सु+अस्ति=स्वास्ति’ इसमें ’इकोयणचि’सूत्र
से उकार के स्थान में वकार हुआ है। ’स्वास्ति’ में भी ’अस्ति’
को अव्यय माना गया है और ’स्वास्ति’ अव्यय पद का अर्थ
’कल्याण’ ’मंगल’ ’शुभ’ आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है।
जब स्वास्ति में ’क’ प्रत्यय का समावेश हो जाता है तो वह
कारक का रूप धारण कर लेता है और उसे ’स्वास्तिक’
का नाम दे दिया जाता है। स्वास्तिक का निशान भारत
के अलावा विश्व में अन्य देशों में भी प्रयोग में
लाया जाता है,जर्मन देश में इसे राजकीय चिन्ह से
शोभायमान किया गया है,अन्ग्रेजी के क्रास में
भी स्वास्तिक का बदला हुआ रूप मिलता है,हिटलर का यह
फ़ौज का निशान था,कहा जाता है कि वह इसे
अपनी वर्दी पर दोनो तरफ़ बैज के रूप में प्रयोग
करता था,लेकिन उसके अंत के समय भूल से बर्दी के बेज में उसे
टेलर ने उल्टा लगा दिया था,जितना शुभ अर्थ सीधे
स्वास्तिक का लगाया जाता है,उससे भी अधिक उल्टे
स्वास्तिक का अनर्थ भी माना जाता है। स्वास्तिक
की भुजाओं का प्रयोग अन्दर की तरफ़ गोलाई में लाने पर
वह सौम्य माना जाता है,बाहर की तरफ़ नुकीले हथियार
के रूप में करने पर वह रक्षक के रूप में माना जाता है।
काला स्वास्तिक शमशानी शक्तियों को बस में करने के
लिये किया जाता है,लाल स्वास्तिक का प्रयोग शरीर
की सुरक्षा के साथ भौतिक सुरक्षा के
प्रति भी माना जाता है,डाक्टरों ने भी स्वास्तिक
का प्रयोग आदि काल से किया है,लेकिन वहां सौम्यता और
दिशा निर्देश नही होता है। केवल धन (+) का निशान
ही मिलता है। पीले रंग का स्वास्तिक धर्म के मामलों में
और संस्कार के मामलों में किया जाता है,विभिन्न
रंगों का प्रयोग विभिन्न कारणों के लिये किया जाता है


साभार :भारतीय संस्कृति ही सर्व श्रेष्ट हैं, फेसबुक 

!! क्यों हिटलर ने अपनी सेना का साइन स्वस्तिक चयन किया !!




!! क्यों हिटलर ने अपनी सेना का साइन स्वस्तिक चयन किया !!

उन्होंने मीन कैम्फ ("मेरा संघर्ष") नामक अपनी आत्मकथा लिखी।
उन्होंने स्वस्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो कि हिन्दुओ का शुभ चिह्र है समाचारपत्रों के द्वारा हिटलर ने अपने दल के सिद्धांतों का प्रचार जनता में किया।

इसमें नाजी दल के सिद्धांतों का विवेचन किया। उन्होंने लिखा कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं। उन्हें विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। यहूदी सदा से संस्कृति में रोड़ा अटकाते आए हैं।

Hitler has given explanation to this question in his treatise ‘Mein Kampf’ (My Struggle) which outlines his political philosophy. He identified swastika symbol as an emblem of the ancient civilization of Aryans and also as a symbol of success.

In public, Hitler often praised Christian heritage and German Christian culture, and professed a belief in an "Aryan"

Hitler considered Germans as Aryans, but not the English, French or the Scandinavians! Hitler’s ambition was that Aryan civilization should triumph over the world, which basically meant that he wanted to establish German Empire. With this objective in mind he selected the symbol of swastika for Nazi Germany. Each poster propagating Nazi ideology had swastika symbol printed on it. However, the original Aryan word was not swastika but ‘swasti’ which meant ‘be well’ as a benediction! —



साभार :भारतीय संस्क्त्रती ही सर्वश्रेष्ठ हैं. फेसबुक 

Monday, June 4, 2012

बुल्गारिया मे 7000 वर्ष प्राचीन स्वास्तिक चिन्ह मिले हैं| हैं ना आश्चर्यजनक!





स्...वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वस्तिक चिह्व अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। ‘सु’ का अर्थ अच्छा, ‘अस’ का अर्थ ‘सत्ता’ या ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का अर्थ ‘कर्त्ता’ या करने वाले से है। इस प्रकार ‘स्वस्तिक’ शब्द का अर्थ हुआ ‘अच्छा’ या ‘मंगल’ करने वाला।

स्वस्तिक में एक दूसरे को काटती हुई दो सीधी रेखाएँ होती हैं, जो आगे चलकर मुड़ जाती हैं। इसके बाद भी ये रेखाएँ अपने सिरों पर थोड़ी और आगे की तरफ मुड़ी होती हैं।

स्वस्तिक की यह आकृति दो प्रकार की हो सकती है। प्रथम स्वस्तिक, जिसमें रेखाएँ आगे की ओर इंगित करती हुई हमारे दायीं ओर मुड़ती हैं। इसे ‘स्वस्तिक’ (卐) कहते हैं। दूसरी आकृति में रेखाएँ पीछे की ओर संकेत करती हुई हमारे बायीं ओर मुड़ती हैं। इसे ‘वामावर्त स्वस्तिक’ (卍) कहते हैं। जर्मनी के हिटलर के ध्वज में यही ‘वामावर्त स्वस्तिक’ अंकित था।

लेकिन यही स्वास्तिक, यदि हम कहें कि बुल्गारिया में 7000 वर्ष पहले इस्तेमाल होता था, तो आपको आश्चर्य होगा| लेकिन यह सत्य है|
उत्तर-पश्चिमी बुल्गारिया के Vratsa नगर के संग्रहालय मे चल रही एक प्रदर्शनी मे 7000 वर्ष प्राचीन कुछ मिट्टी की कलाकृतियां रखी हई हैं जिसपर स्वास्तिक (卍) का चिन्ह बना है| Vratsa शहर के ही निकट Altimir नामक गाँव के एक धार्मिक यज्ञ कुण्ड के खुदाई के समय ये कलाकृतियाँ मिली थी |


साभार : FB NEWS